School Holiday : जनवरी का महीना देशभर के स्कूली बच्चों के लिए खुशखबरी लेकर आया है। जहां उत्तर भारत के कई राज्यों में कड़ाके की ठंड और घने कोहरे के कारण शीतकालीन अवकाश बढ़ा दिए गए हैं, वहीं दक्षिण भारत के एक राज्य में भव्य त्योहारों के चलते लगातार 5 दिनों तक स्कूल बंद रहने वाले हैं। यह राज्य है तमिलनाडु।
पोंगल पर्व के अवसर पर तमिलनाडु सरकार ने स्कूलों में 14 जनवरी से 18 जनवरी तक अवकाश घोषित किया है। नीचे पूरी छुट्टियों की सूची और इसके पीछे के खास कारण बताए गए हैं।
School Holiday News : तमिलनाडु में 5 दिनों की स्कूल छुट्टियों का पूरा शेड्यूल
पोंगल के उत्सव को ध्यान में रखते हुए तमिलनाडु सरकार ने शैक्षणिक संस्थानों के लिए विस्तृत अवकाश कैलेंडर जारी किया है:
14 जनवरी (बुधवार) – भोगी पोंगल
यह दिन पोंगल उत्सव की शुरुआत का प्रतीक है। इस दिन पुराने और बेकार सामान को त्यागकर नए जीवन की शुरुआत की जाती है। कई स्कूलों में इस दिन पूर्ण या आंशिक अवकाश रहता है।
15 जनवरी (गुरुवार) – थाई पोंगल
यह पोंगल का मुख्य दिन होता है, जिसे उत्तर भारत में मकर संक्रांति के रूप में मनाया जाता है। इस दिन सूर्य देव की पूजा की जाती है और अच्छी फसल के लिए आभार व्यक्त किया जाता है।
16 जनवरी (शुक्रवार) – मट्टू पोंगल / तिरुवल्लुवर जयंती
यह दिन कृषि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले पशुओं जैसे गाय और बैलों को समर्पित होता है। साथ ही, यह महान तमिल कवि और दार्शनिक तिरुवल्लुवर की जयंती के रूप में भी मनाया जाता है।
17 जनवरी (शनिवार) – कानुम पोंगल / उझावर तिरुनाल
यह दिन परिवार के साथ समय बिताने और किसानों के सम्मान के लिए समर्पित होता है। चूंकि यह शनिवार है, इसलिए स्कूल स्वाभाविक रूप से बंद रहते हैं।
18 जनवरी (रविवार)
साप्ताहिक अवकाश।
नोट: इतने लंबे अवकाश के बाद सभी स्कूल 19 जनवरी (सोमवार) से दोबारा खुलेंगे।
School Holiday : पोंगल पर्व और ‘उफनते चावल’ की परंपरा का महत्व
पोंगल सिर्फ एक त्योहार नहीं है, बल्कि यह प्रकृति और किसानों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का माध्यम है।
- ‘पोंगल’ शब्द का अर्थ है – उफनना या उबाल आना।
- परंपरा: नए कटे हुए चावल, दूध और गुड़ को नए मिट्टी के बर्तन में पकाया जाता है। जब यह मिश्रण उफनता है, तो इसे समृद्धि और खुशहाली का प्रतीक माना जाता है।
- इस दौरान लोग “पोंगलो पोंगल” का जयघोष करते हैं और घर में सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।
तिरुवल्लुवर जयंती: ज्ञान और भाषा का उत्सव
16 जनवरी को महान दार्शनिक तिरुवल्लुवर की जयंती भी मनाई जाती है। हाल ही में शिक्षा मंत्रालय ने उनके प्रसिद्ध ग्रंथ ‘तिरुक्कुरल’ को सांकेतिक भाषा (Sign Language) में लॉन्च किया है, जिससे यह दिव्यांगजनों सहित समाज के हर वर्ग के लिए सुलभ हो सके।
सरकार का मानना है कि ऐसे कालजयी साहित्यिक ग्रंथ देश को सांस्कृतिक और भाषाई रूप से एकजुट करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।